हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, और इनमें सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi 2026)। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु चार महीनों के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। भगवान विष्णु के शयनकाल में जाने के साथ ही चातुर्मास का आरंभ हो जाता है, जिसके दौरान सभी प्रकार के मांगलिक और शुभ कार्य थम जाते हैं।
साल 2026 में देवशयनी एकादशी का व्रत बेहद खास रहने वाला है। यदि आप भी इस दिन व्रत रखने या भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करने की सोच रहे हैं, तो इसके नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। आइए जानते हैं देवशयनी एकादशी पर क्या करना चाहिए और किन कामों से पूरी तरह बचना चाहिए।
देवशयनी एकादशी पर क्या करें? (Dos on Devshayani Ekadashi)
देवशयनी एकादशी के दिन कुछ विशेष कार्यों को करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की असीम कृपा प्राप्त होती है:
- भगवान विष्णु का पीला श्रृंगार: एकादशी के दिन भगवान विष्णु को पीले रंग के वस्त्र, पीले फूल, पीला चंदन और पीले फल अर्पित करें।
- तुलसी पूजा: इस दिन शाम के समय तुलसी के पौधे के सामने घी का दीपक जरूर जलाएं और उनकी परिक्रमा करें। लेकिन याद रखें कि इस दिन तुलसी के पत्ते न तोड़ें।
- मंत्र जाप और कीर्तन: 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप करें। इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना बेहद फलदायी माना जाता है।
- दान-पुण्य: देवशयनी एकादशी पर गरीबों और जरूरतमंदों को पीले अनाज, वस्त्र या छाते का दान करना शुभ माना जाता है।
देवशयनी एकादशी पर क्या न करें? (Don'ts on Devshayani Ekadashi)
शास्त्रों के अनुसार, एकादशी के दिन कुछ गलतियों को करने से व्रत का फल नष्ट हो जाता है और जीवन में परेशानियां आ सकती हैं:
- चावल का सेवन न करें: एकादशी के दिन घर में किसी भी सदस्य को चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि इस दिन चावल खाने से मनुष्य का मन अशांत होता है।
- मांगलिक कार्य वर्जित: देवशयनी एकादशी से चातुर्मास शुरू हो जाता है, इसलिए इस दिन से अगले चार महीनों तक विवाह, मुंडन, जनेऊ और गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य नहीं करने चाहिए।
- तामसिक भोजन से बचें: इस दिन भूलकर भी मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज का सेवन न करें। पूर्ण रूप से सात्विक आचरण अपनाएं।
- क्रोध और वाद-विवाद से बचें: एकादशी व्रत के दौरान किसी की बुराई न करें, झूठ न बोलें और न ही किसी पर क्रोध करें। अपना पूरा ध्यान ईश्वर भक्ति में लगाएं।
देवशयनी एकादशी 2026 के मुख्य बिंदु
- संबंधित वर्ष: साल 2026
- तिथि का नाम: आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी (देवशयनी एकादशी)
- विशेष प्रभाव: इस दिन से ही 4 महीनों के चातुर्मास नियम की शुरुआत होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. साल 2026 में देवशयनी एकादशी के साथ क्या शुरू होता है?साल 2026 में देवशयनी एकादशी के दिन से ही चातुर्मास का आरंभ होता है। इसके बाद भगवान विष्णु चार महीनों के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं और इस दौरान सभी मांगलिक कार्य बंद हो जाते हैं।
Q2. देवशयनी एकादशी पर चावल खाना क्यों वर्जित है?धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, एकादशी के दिन जल तत्व की प्रधानता रहती है और चावल में जल की मात्रा सबसे अधिक होती है। चावल खाने से मन विचलित होता है और साधना में बाधा आती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन चावल खाने वाला व्यक्ति अगले जन्म में रेंगने वाले जीव की योनि प्राप्त करता है।
Q3. देवशयनी एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते क्यों नहीं तोड़ने चाहिए?तुलसी जी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय हैं और वे एकादशी के दिन भगवान विष्णु के लिए व्रत रखती हैं। इसलिए एकादशी के दिन तुलसी माता को स्पर्श करना या उनके पत्ते तोड़ना वर्जित माना गया है। पूजन के लिए पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रख लेने चाहिए।

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