हिंदू धर्म में सावन (श्रावण) के पवित्र महीने का विशेष महत्व है। यह पूरा महीना भगवान शिव की आराधना के लिए समर्पित होता है। इस पावन महीने में पड़ने वाली चतुर्थी तिथि का महत्व और भी बढ़ जाता है। इस बार सावन महीने की पहली संकष्टी चतुर्थी का पावन व्रत 2 अगस्त को रखा जाएगा। इस दिन भगवान शिव और उनके प्रिय पुत्र विघ्नहर्ता भगवान गणेश की संयुक्त पूजा-अर्चना का महासंयोग बन रहा है।
संकष्टी चतुर्थी व्रत की महत्वपूर्ण तिथि
- व्रत की तिथि: 2 अगस्त
- मुख्य अवसर: सावन महीने की पहली संकष्टी चतुर्थी
- विशेष अनुष्ठान: भगवान शिव और गणपति जी का पंचामृत से अभिषेक
शिव-गौरी पुत्र गणेश की कृपा पाने का महासंयोग
शास्त्रों के अनुसार, सावन के महीने में शिव परिवार की पूजा करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है। संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन की सभी विघ्न-बाधाएं दूर हो जाती हैं। इस विशेष दिन पर भगवान शिव और गणपति जी का पंचामृत से अभिषेक करने का विधान है। माना जाता है कि ऐसा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और घर में सुख, शांति तथा समृद्धि का वास होता है।
पूजा की सरल विधि और पंचामृत अभिषेक
इस शुभ दिन पर सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके भगवान शिव और गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें। तांबे या पीतल के पात्र में दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल मिलाकर पंचामृत तैयार करें। इस पंचामृत से महादेव और गणपति बप्पा का श्रद्धापूर्वक अभिषेक करें। पूजा के दौरान भगवान गणेश को दूर्वा, मोदक और भगवान शिव को बेलपत्र अवश्य अर्पित करें। अंत में आरती कर व्रत का संकल्प लें और शाम को चंद्रोदय के बाद अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. सावन की पहली संकष्टी चतुर्थी कब है?सावन महीने की पहली संकष्टी चतुर्थी का पावन व्रत 2 अगस्त को रखा जाएगा।
Q2. संकष्टी चतुर्थी के दिन किसका अभिषेक करना चाहिए?इस विशेष दिन पर भगवान शिव और गणेश जी दोनों का पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल) से अभिषेक करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।
Q3. सावन संकष्टी चतुर्थी व्रत रखने से क्या लाभ होता है?इस व्रत को रखने और शिव-गणेश की संयुक्त पूजा करने से जीवन के सभी दुख और संकट दूर होते हैं, कार्यों में आ रही बाधाएं समाप्त होती हैं और घर में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

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