पैसा कमाना एक बात है, लेकिन पैसे का टिकना और उसमें वृद्धि होना बिल्कुल अलग बात है। कई बार हम खूब मेहनत करते हैं, लेकिन धन संचय नहीं हो पाता। वैदिक ज्योतिष में इसका सीधा संबंध आपकी कुंडली के द्वितीय भाव (Second House) यानी 'धन भाव' से होता है।
धन भाव (द्वितीय भाव) का रहस्य क्या है? कुंडली का दूसरा घर आपके बैंक बैलेंस, पैतृक संपत्ति, वाणी और परिवार का होता है। जबकि ग्यारहवां घर (11th House) आपकी 'आय' (Income) का होता है।
यदि दूसरे भाव का स्वामी (धनेश) मजबूत होकर 11वें, 9वें या 10वें भाव में बैठा हो, तो व्यक्ति के पास अपार धन होता है।
गुरु (Jupiter) धन का नैसर्गिक कारक है। गुरु का दूसरे भाव पर प्रभाव इंसान को कभी गरीब नहीं होने देता।
यदि दूसरे भाव में राहु, केतु या नीच का शनि हो, तो पैसा पानी की तरह बह जाता है और कर्ज़ बढ़ता है।
धन प्राप्ति और धन संचय के अचूक ज्योतिषीय उपाय यदि आपके पास पैसा नहीं टिक रहा है, तो इन वैदिक उपायों को अपनी दिनचर्या में शामिल करें:
शुक्रवार के दिन श्री सूक्त का पाठ: माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने और धन का स्थायी वास बनाने के लिए हर शुक्रवार श्री सूक्त (Shri Suktam) या कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें।
गुरु ग्रह को मजबूत करें: धन के कारक गुरु को मजबूत करने के लिए गुरुवार के दिन पीली वस्तुओं (चने की दाल, हल्दी) का दान करें और माथे पर केसर का तिलक लगाएं।
लॉकर की दिशा: घर या ऑफिस में अपना कैश बॉक्स या तिजोरी हमेशा इस तरह रखें कि उसका दरवाजा उत्तर दिशा (कुबेर की दिशा) की ओर खुले।
नमक के पानी का पोंछा: घर से नकारात्मक ऊर्जा (जो धन को रोकती है) को बाहर निकालने के लिए हफ्ते में कम से कम दो बार पानी में समुद्री नमक (Sea Salt) डालकर पोंछा लगाएं।
निष्कर्ष धन का सीधा संबंध आपकी मानसिक शांति से है। अपने धन भाव को मजबूत करके आप जीवन में प्रचुरता (Abundance) पा सकते हैं। अपनी राशि के अनुसार विशेष धन प्राप्ति के उपाय जानने के लिए RashiX के दैनिक राशिफल अनुभाग को पढ़ना न भूलें।

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